राज्यपाल के बयान का मंत्री असीम अरुण ने किया समर्थन, बोले- नौकरशाही के 'स्टील फ्रेम' मॉडल पर हो पुनर्विचार
Minister Asim Arun backs Governor's statement
लखनऊ। Minister Asim Arun backs Governor's statement, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पिछले दिनों उच्च शिक्षा में स्कूटी योजना की नीति की शर्तों और नौकरशाही की कार्यशैली पर टिप्पणी को बड़ा समर्थन मिला है। नौकरशाही से राजनीति में आए समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने भी प्रशासनिक व्यवस्था की खामियों पर गंभीर प्रश्न उठा दिए हैं।
समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और कन्नौज से विधायक असीम अरुण ने इंटरनेट मीडिया पर लिखी विस्तृत टिप्पणी में उन्होंने राज्यपाल के विचारों का समर्थन किया।
उन्होंने हुए कहा कि सरकारी नीतियां केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर लागू होने लायक होनी चाहिए। उन्होंने मौजूदा नौकरशाही के ''स्टील फ्रेम'' माडल पर पुनर्विचार की वकालत करते हुए भर्ती, विशेषज्ञता, पोस्टिंग और लेटरल एंट्री (सीधी भर्ती) जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार की जरूरत बताई।
आक्रोश और चिंता पूरी तरह उचित
आईपीएस की सेवा से वीआरएस लेकर वर्ष 2022 में राजनीति में आए मंत्री असीम अरुण ने लिखा कि राज्यपाल का प्रशासनिक व्यवस्था और आइएएस अधिकारियों के कामकाज को लेकर व्यक्त किया गया आक्रोश और चिंता पूरी तरह उचित है। राज्यपाल का कहना है कि जब तक नीतियां व्यावहारिक नहीं होंगी, तब तक लोककल्याण का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। मंत्री ने कहा कि समस्या किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की है और समाधान भी व्यवस्था में बदलाव से ही निकलेगा।
'स्टील फ्रेम' पर गंभीरता से पुनर्विचार का समय
असीम अरुण ने कहा कि संविधान लागू होने के 76 वर्ष बाद अब भारतीय नौकरशाही के उस ''स्टील फ्रेम'' पर गंभीरता से पुनर्विचार का समय आ गया है, जिसे कभी प्रशासन की रीढ़ माना जाता था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा व्यवस्था विकसित भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप है या अब अधिक लचीले और परिणामोन्मुखी ढांचे की जरूरत है।
सिस्टम अभी भी कमजोर
उन्होंने कहा कि किसी भी आदर्श नौकरशाही की पहचान कुछ उत्कृष्ट अधिकारियों से नहीं, बल्कि मजबूत संस्थागत व्यवस्था से होती है। चुनाव आयोग और आपदा प्रबंधन प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों की सफलता व्यक्ति नहीं, बल्कि मजबूत प्रक्रियाओं और संस्थागत तंत्र की देन है। वहीं, भूमि प्रबंधन, यातायात, हाउस टैक्स संग्रह और नगर नियोजन जैसे क्षेत्रों में सिस्टम अभी भी कमजोर है।
सेवाओं के लिए विषय-विशेष आधारित चयन
भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभिन्न सेवाओं के लिए विषय-विशेष आधारित चयन होना चाहिए। विदेश सेवा, राजस्व, पुलिस और आडिट जैसी सेवाओं के लिए अलग-अलग परीक्षा प्रणाली विकसित करने की जरूरत है। प्रशासन में विशेषज्ञता बढ़ाने, योग्यता आधारित पोस्टिंग, ''च्वाइस-कम-मेरिट'' प्रणाली और लेटरल एंट्री का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनना है तो उसकी प्रशासनिक व्यवस्था को भी उसी गति से बदलना होगा।